Web Stories

कर्ण का पूर्वजन्म: सहस्र कवच वाला असुर दंभोद्भवा | महाभारत रहस्य

सतयुग में दंभोद्भवा नामक एक असुर था, जिसे लोग दुरदुंभ भी कहते थे। उसने सहस्त्रों वर्षों तक कठोर तप कर सूर्यदेव को प्रसन्न किया। जब सूर्यदेव प्रकट हुए, तो उसने अमरत्व का वरदान माँगा।
परंतु सूर्यदेव ने कहा – “यह संभव नहीं। जो जन्मा है, उसका अंत निश्चित है।”

तब दुरदुंभ ने एक विचित्र वरदान माँगा –
“मुझे एक सहस्र दिव्य कवच प्रदान हों। प्रत्येक कवच ऐसा हो कि केवल वही उसे भेद सके जिसने एक हजार वर्षों की तपस्या की हो। और जैसे ही कोई मेरा एक कवच भेदे, उसी क्षण उसकी मृत्यु हो जाए।”

सूर्यदेव ने यह वरदान स्वीकार किया और उसे दिव्य कुंडल भी दिए।

इन अलौकिक शक्तियों से अहंकारी बनकर दुरदुंभ ने तीनों लोकों में अत्याचार मचाया। देवता, ऋषि और मनुष्य सभी उसकी शक्ति से भयभीत हो उठे। तब सभी देवता भगवान विष्णु के चरणों में पहुँचे।

भगवान विष्णु ने कहा – “चिंता मत करो। मैं नर और नारायण के रूप में इस संकट का अंत करूँगा।”

योजना बनी। नर युद्धभूमि में उतरे और नारायण तप में लीन हुए।
जब नर ने युद्ध करते हुए असुर का पहला कवच भेदा, वरदान के अनुसार वे तुरंत मृत्यु को प्राप्त हो गए। किंतु तभी नारायण ने अपनी तपशक्ति से नर को पुनर्जीवित कर दिया।
अब बारी नारायण की थी। उन्होंने युद्ध किया, दूसरा कवच भेदा और मृत्यु को प्राप्त हुए। इस बार नर ने उन्हें पुनर्जीवित किया।
यह क्रम सहस्त्रों वर्षों तक चलता रहा। एक-एक करके 999 कवच भंग हो गए।
जब केवल अंतिम कवच शेष रह गया, तब दुरदुंभ भयभीत हो उठा। अपनी मृत्यु से डरकर वह भागा और सूर्यदेव की शरण में जा छिपा।
नर-नारायण वहाँ पहुँचे और बोले – “हे सूर्यदेव, इस अधर्मी को हमें सौंप दीजिए।”

पर सूर्यदेव ने कहा – “शरणागत की रक्षा करना मेरा धर्म है।”

तब नर-नारायण ने कहा –
“आपने एक अधर्मी को आश्रय दिया है। अब इसका फल आपको भी भोगना होगा। यह असुर द्वापर युग में आपके ही तेज से जन्म लेगा। उस जन्म में यह अंतिम कवच और कुंडल साथ लाएगा, परंतु मृत्यु के समय ये भी इसकी रक्षा नहीं कर पाएँगे।”

और वही असुर द्वापर युग में कुंतीपुत्र कर्ण के रूप में जन्मा। जन्म के साथ ही उसे दिव्य कवच और कुंडल प्राप्त थे।
नियति का लेख अटल था—नर और नारायण ही क्रमशः अर्जुन और श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित हुए और महाभारत के युद्ध में कर्ण के अंत का कारण बने।

Tv10 India

Recent Posts

बदरीनाथ धाम को हाईटेक अस्पताल की सौगात, अक्तूबर में पीएम मोदी कर सकते हैं उद्घाटन

मास्टर प्लान के तहत तैयार हो रहा चार मंजिला सब-जिला अस्पताल, 31 अगस्त तक काम…

11 hours ago

उत्तराखंड: रिवर्स पलायन को गति देने के लिए हर जिले में होंगी प्रवासी पंचायतें, सीएम धामी ने दिए निर्देश

गांव लौटे प्रवासियों के अनुभवों और स्वरोजगार के प्रयासों को साझा करने पर जोर सितंबर…

12 hours ago

सीएम धामी का बड़ा ऐलान: देहरादून के ’13 गांव’ में बनेगा राज्य स्तरीय विपणन केंद्र; स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित 'मुख्य सेवक सदन' में मुख्यमंत्री उद्यमशाला…

16 hours ago

उत्तराखंड: मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के तहत ‘चौपाल-2026’ का आयोजन; टिहरी और चमोली में प्रचार वाहनों को दिखाई हरी झंडी

टिहरी गढ़वाल :उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने, स्थानीय उत्पादों को…

17 hours ago

हाईकोर्ट शिफ्टिंग विवाद: नैनीताल से हल्द्वानी ट्रांसफर पर सुनवाई पूरी, खंडपीठ ने सुरक्षित रखा फैसला

नैनीताल उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी के बेल बाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने…

18 hours ago

IIT रुड़की और GB पंत संस्थान की चेतावनी: जलवायु परिवर्तन से कोसी नदी पर गहराया खतरा, तेजी से गिरेगा भूजल

रुड़की :उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली कोसी नदी बेसिन पर आने…

2 days ago