देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में राजस्व निरीक्षक, उप निरीक्षक और सेवक संघ का दो दिवसीय कार्य बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन बुधवार को भी पूरे जोश के साथ जारी रहा। कालसी, चकराता और त्यूणी के सैकड़ों राजस्वकर्मी आंदोलन में शामिल हुए। आंदोलन के कारण तहसीलों में जरूरी प्रशासनिक कार्य ठप हो गए, जिससे आम लोगों, खासकर ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
संघ के तहसील अध्यक्ष अखिलेश कुमार ने कहा कि राजस्वकर्मियों पर पहले से ही अत्यधिक काम का दबाव होता है। इसके बावजूद उनसे पुलिस संबंधी कार्य जैसे क्षेत्रीय कानून व्यवस्था संभालने और जांच आदि कराई जाती है, जिससे उनका मूल राजस्व कार्य प्रभावित होता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय पहले ही राजस्व पुलिस क्षेत्रों को सिविल पुलिस को सौंपने के निर्देश दे चुका है। लेकिन अब तक शासन स्तर से इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे कर्मचारियों में रोष है।
संघ नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक शासन द्वारा उनकी मांगों पर अमल नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। धरने में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि वे न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और प्रशासन को उनकी आवाज अनसुनी नहीं करनी चाहिए।
प्रदर्शन के चलते खतौनी, जाति/निवास प्रमाण पत्र, भूमि संबंधित प्रमाणन जैसे कई कार्य अटक गए। ग्रामीणों को दूरदराज से आकर भी काम न होने पर वापस लौटना पड़ा। तहसील परिसरों में सन्नाटा पसरा रहा।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि वे राजस्वकर्मियों से पुलिस कार्य वापस लेने और खतौनी के अंश निर्धारण का कार्य उनसे न कराए जाने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं।
उनका कहना है कि उन्हें मूल राजस्व कार्यों में ही व्यस्त रखा जाए और अतिरिक्त पुलिस या कानूनी जिम्मेदारियों को उन पर न थोपा जाए।
धरने के दौरान सभी राजस्वकर्मियों ने तहसील मुख्यालय परिसर में एकजुट होकर जोरदार नारेबाज़ी की। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द उनकी मांगों को मानने की अपील की, वरना आंदोलन को और अधिक तीव्र रूप देने की चेतावनी दी।
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