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कार्तिक माह में दीप दान का महत्व !!

कार्तिक माह में दीप दान करना बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि कार्तिक माह में आकाश मंडल का सबसे बड़ा ग्रह सूर्य अपनी नीच की राशि तुला में गमन करता है, इस वजह से वातावरण में अंधकार छाने लगता है। यही कारण है कि इस पूरे माह में दीपक जलाने, जप -तप करने तथा दान और स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। अगर किसी विशेष कारण से कार्तिक के पूरे महीने में प्रत्येक दिन आप दीपदान करने में असमर्थ हैं, तो कार्तिक के विशेष दिन यानी कि कार्तिक पूर्णिमा को अवश्य ही दीपक प्रज्जवलित करने चाहिए।

कार्तिक में दीप-दान का महत्व

ऐसा कहा गया है कि जो व्यक्ति कार्तिक मास में श्रीकेशव के निकट अखण्ड दीपदान करता है, वह दिव्य कान्ति से युक्त हो जाता है। कार्तिक माह में पहले पंद्रह दिनों में अँधेरी रातें होती हैं। मान्यता ये है कि भगवान विष्णु के निद्रा त्यागने के कुछ दिन पूर्व यानी की कार्तिक माह में दीप जलाने से जीवन का अंधकार दूर होता है। जो व्यक्ति कार्तिक मास में दीपदान करता है, वह दिव्य कान्ति से युक्त हो जाता है।

पद्मपुराण के उत्तरखंड में स्वयं महादेव कार्तिकेय को दीपावली, कार्तिक कृष्णपक्ष के पांच दिन में दीपदान का विशेष महत्व बताते हैं।

कृष्णपक्षे विशेषेण पुत्र पंचदिनानि च ,
पुण्यानि तेषु यो दत्ते दीपं सोऽक्षयमाप्नुयात्
||

विशेषतः कृष्णपक्ष में 5 दिन (रमा एकादशी से दीपावली तक) बड़े पवित्र हैं। उनमें जो भी दान किया जाता है, वह सब अक्षय और सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है।

अग्निपुराण के अनुसार

अग्निपुराण में बताया गया है कि जो मनुष्य देव मंदिर अथवा ब्राह्मण के गृह में दीपदान करता है, वह सबकुछ प्राप्त कर लेता है। पद्मपुराण के अनुसार मंदिरों में और नदी के किनारे दीपदान करने से लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं। दुर्गम स्थान अथवा भूमि पर दीपदान करने से व्यक्ति नरक जाने से बच जाता है।

लक्ष्‍मी प्राप्ति के लिए

पद्मपुराण के अनुसार, जो देवालय में, नदी के किनारे, सड़क पर दीप देता है, उसे सर्वतोमुखी लक्ष्मी प्राप्त होती है। कार्तिक में प्रतिदिन दो दीपक जरूर जलाएं। एक श्रीहरि नारायण के समक्ष तथा दूसरा शिवलिंग के समक्ष जलाएं।

शिवजी के सम्‍मुख जलाएं दीप

जो कार्तिक मास की रात्रि में श्रद्धापूर्वक शिवजी के समीप दीपमाला समर्पित करता है, उसके चढ़ाये गए वे दीप शिवलिंग के सामने जितने समय तक जलते हैं, उतने हजार युगों तक दाता स्वर्गलोक में प्रतिष्ठित होता है। जो कार्तिक महीने में शिवजी के सामने घृत का दीपक समर्पित करता है, वह ब्रह्मलोक को जाता है।

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