देहरादून: मिडिल ईस्ट (ईरान-इजरायल-अमेरिका) के बीच बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव की तपिश अब उत्तराखंड के हिमालयी शिखरों तक पहुँचने लगी है। 19 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा 2026 के लिए जहाँ एक ओर रिकॉर्ड श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक युद्ध के हालातों ने एलपीजी (LPG) और कच्चा तेल (Fuel) की आपूर्ति को लेकर सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर भारत में कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति पर पड़ रहा है। चारधाम रूट पर स्थित हजारों होटल, रिसॉर्ट और ढाबा संचालक अभी से गैस की किल्लत महसूस करने लगे हैं।
यात्रा के आगाज में अब महज 20-22 दिन बचे हैं। धामों के कपाट खुलने की तिथियां तय हो चुकी हैं:
चारधाम यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून से लगभग 4,500 से 5,000 वाहन (बस, टैक्सी, टेंपो ट्रैवलर) श्रद्धालुओं को लेकर पहाड़ों पर चढ़ते हैं।
अंतरराष्ट्रीय संकट को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने ‘डबल बैकअप’ पर काम शुरू किया है:
चारधाम यात्रा प्रशासन संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, 20 लाख सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति इस सीजन की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होगी। यदि युद्ध विराम नहीं होता है, तो सरकार को राशनिंग या वैकल्पिक ऊर्जा के कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। फिलहाल, प्रशासन ने यात्रियों और व्यापारियों से ‘पैनिक’ न होने और धैर्य के साथ संसाधनों का उपयोग करने की अपील की है।
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